पेट्रोल पंप पर भी मिलेगा केरोसिन, सरकार का बड़ा फैसला
Kerosene: केंद्र सरकार ने आम लोगों को राहत देने के लिए एक अहम फैसला लिया है, जिसके तहत अब राशन की दुकानों के साथ-साथ चुनिंदा पेट्रोल पंपों पर भी केरोसिन (मिट्टी का तेल) उपलब्ध कराया जाएगा। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है और भारत में भी पेट्रोल-डीजल तथा रसोई गैस की उपलब्धता को लेकर दबाव महसूस किया जा रहा है।

सरकार के इस फैसले का मुख्य उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों तक ईंधन की आपूर्ति को आसान बनाना है, ताकि उन्हें खाना पकाने और रोशनी जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए परेशानी का सामना न करना पड़े। खासकर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों के लिए यह निर्णय काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Read More: 1100 फर्जी बम धमकी देने वाला आरोपी गिरफ्तार
क्या है नया फैसला?
सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के नियमों में 60 दिनों के लिए अस्थायी ढील दी है। इस अवधि के दौरान, केरोसिन की सप्लाई और वितरण को आसान बनाने के लिए कुछ नियमों को सरल किया गया है। अब सरकारी तेल कंपनियां चुनिंदा पेट्रोल पंपों के जरिए भी केरोसिन का भंडारण और वितरण कर सकेंगी।
हर जिले में अधिकतम दो पेट्रोल पंपों को इस सुविधा के लिए चुना जाएगा। इन पेट्रोल पंपों पर अधिकतम 5,000 लीटर तक केरोसिन स्टोर करने की अनुमति होगी। यह व्यवस्था अस्थायी है, लेकिन जरूरत पड़ने पर इसे आगे भी बढ़ाया जा सकता है।
In view of the prevailing geopolitical situation affecting energy supplies worldwide, the Central Government has decided to make an ad hoc allocation of Public Distribution System (PDS) Superior Kerosene Oil (SKO) to the States/Union Territories (UTs), including 21 States/UTs… pic.twitter.com/EDX9ZBXDkW
— ANI (@ANI) March 29, 2026
किन कंपनियों की होगी भूमिका?
सरकारी तेल कंपनियां जैसे- Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum और Hindustan Petroleum इस योजना को लागू करने में प्रमुख भूमिका निभाएंगी। ये कंपनियां अपने नेटवर्क के तहत आने वाले पेट्रोल पंपों को चिन्हित करेंगी और वहां केरोसिन की उपलब्धता सुनिश्चित करेंगी।
क्यों लिया गया यह निर्णय?
बताते चले कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और वैश्विक स्तर पर बढ़ते ऊर्जा संकट के कारण ईंधन की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। ऐसे हालात में भारत भी इससे अछूता नहीं है। रसोई गैस की कमी और कीमतों में उतार-चढ़ाव के चलते कई परिवारों के लिए खाना पकाना मुश्किल हो रहा है। इसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए सरकार ने केरोसिन की उपलब्धता बढ़ाने का फैसला लिया है। केरोसिन एक सस्ता और आसानी से उपलब्ध ईंधन है, जिसका उपयोग खासतौर पर गरीब और ग्रामीण इलाकों में किया जाता है।
आम लोगों को कैसे मिलेगा फायदा?
इस फैसले का सीधा लाभ उन परिवारों को मिलेगा जो अब तक सिर्फ राशन की दुकानों पर निर्भर थे। कई बार राशन दुकानों पर सप्लाई में देरी या कमी हो जाती थी, जिससे लोगों को परेशानी होती थी। अब पेट्रोल पंपों पर भी केरोसिन मिलने से वितरण नेटवर्क मजबूत होगा और लोगों को समय पर ईंधन मिल सकेगा।
इसके अलावा, पेट्रोल पंपों की संख्या और पहुंच ज्यादा होने के कारण लोगों को लंबी दूरी तय करने की जरूरत भी कम होगी। इससे समय और श्रम दोनों की बचत होगी।
केवल घरेलू उपयोग के लिए
सरकार ने साफ किया है कि केरोसिन केवल घरेलू उपयोग के लिए ही दिया जाएगा। इसका इस्तेमाल खाना पकाने और रोशनी के लिए किया जा सकेगा। इसका व्यावसायिक उपयोग या दुरुपयोग रोकने के लिए सख्त निगरानी की जाएगी।
नियमों में क्या बदलाव किए गए हैं?
सरकार ने सप्लाई चेन को तेज करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण छूट दी हैं:
- केरोसिन वितरित करने वाले एजेंट और डीलरों को लाइसेंस से अस्थायी छूट।
- टैंकरों से केरोसिन उतारने और सप्लाई के नियम सरल किए गए।
- पेट्रोल पंपों पर स्टोरेज और वितरण की अनुमति।
- इन बदलावों से वितरण प्रक्रिया तेज होगी और अंतिम उपभोक्ता तक केरोसिन समय पर पहुंच सकेगा।

भारत में केरोसिन का बदलता स्वरूप
पिछले कुछ वर्षों में भारत में केरोसिन के उपयोग को धीरे-धीरे कम किया गया है। सरकार ने उज्ज्वला योजना और बिजली कनेक्शन योजनाओं के जरिए एलपीजी और बिजली के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया। इसका उद्देश्य लोगों को स्वच्छ ऊर्जा की ओर ले जाना था।
दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ जैसे राज्यों ने तो खुद को केरोसिन मुक्त भी घोषित कर दिया है। हालांकि, अभी भी देश के कई हिस्सों में केरोसिन की जरूरत बनी हुई है, खासकर जहां गैस और बिजली की पहुंच सीमित है।
India’s energy supply is fully secure and stable.
— Ministry of Petroleum and Natural Gas #MoPNG (@PetroleumMin) March 26, 2026
There is NO shortage of petrol, diesel, or LPG anywhere in the country. All retail outlets are operating normally, with adequate supplies.
Misinformation and panic-driven narratives are completely unfounded. Citizens are advised…
क्या यह अस्थायी समाधान है?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला एक अस्थायी राहत के रूप में देखा जाना चाहिए। सरकार का दीर्घकालिक लक्ष्य अब भी स्वच्छ और आधुनिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देना है। लेकिन मौजूदा संकट को देखते हुए यह कदम जरूरी था। अगर वैश्विक हालात सामान्य होते हैं और गैस की आपूर्ति सुधरती है, तो संभव है कि इस तरह की अस्थायी व्यवस्थाएं वापस ले ली जाएं।
निष्कर्ष- कुल मिलाकर, सरकार का यह फैसला आम आदमी के लिए राहत भरा कदम है। इससे न केवल केरोसिन की उपलब्धता बढ़ेगी, बल्कि वितरण प्रणाली भी मजबूत होगी। खासतौर पर उन लोगों के लिए यह बेहद फायदेमंद साबित होगा जो आज भी पारंपरिक ईंधनों पर निर्भर हैं। हालांकि, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस योजना का क्रियान्वयन कितनी प्रभावी तरीके से होता है और क्या यह वास्तव में जरूरतमंदों तक समय पर लाभ पहुंचा पाता है या नहीं।
the voice of hind news channel
https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%B8%E0%A5%80%E0%A4%A8
