सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सीजेपी का मार्च टला!
दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने केन्द्र सरकार को मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट से जुड़े प्रदर्शनों के दौरान आंदोलनकारियों पर दर्ज प्राथमिकियों को रद्द करने और परीक्षा विवाद के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने का तंत्र तीन महीने के भीतर तैयार करने के निर्देश दिये हैं। न्यायालय के इस निर्देश के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने दिल्ली में आगामी पांच सितंबर को प्रस्तावित अपना मार्च वापस लेने का ऐलान कर दिया।
एफआईआर सुप्रीम कोर्ट ने की रद्द
VIDEO | Delhi: On the Supreme Court's order to quash FIRs against NEET paper leak case protesters across India and provide compensation to affected families, Union Minister JP Nadda says, "On July 25, 2026, Dr Jitendra Singh and I held talks with representatives of the students… pic.twitter.com/1Xd7J3cg9h
— Press Trust of India (@PTI_News) September 1, 2026
उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को 20 से 25 जुलाई के बीच हुए विरोध प्रदर्शनों के समय दर्ज आपराधिक मामलों को समाप्त करने के साथ यह भी निर्देश दिया कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इन घटनाओं से संबंधित प्राथमिकियों पर आगे कार्रवाई न की जाए। इनमें ऐसे मामले शामिल नहीं है जिन्हें न्यायालय ने अपवाद माना है।
5 सितंबर का मार्च टाला
न्यायालय के फैसले के बाद सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने बताया कि संगठन ने मार्च वापस लेने का फैसला किया है। उन्होंने कहा, “सरकार के सकारात्मक आश्वासनों, उन्हें आज मिली न्यायिक पवित्रता और इस अदालत द्वारा पारित आदेश को देखते हुए सीजेपी 5 सितंबर के मार्च के आह्वान को वापस लेती है।”
गौरतलब है कि सीजेपी ने सरकार पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामले वापस लेने और पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने के आश्वासनों को पूरा न करने का आरोप लगाते हुए इस प्रदर्शन का आह्वान किया था।
Important Update🚨
— Cockroach Janta Party – CJP (@Cockroachisback) September 1, 2026
The September 5 India Gate protest is called off.
The Supreme Court has quashed all FIRs against students protesting at Jantar Mantar, with no future FIRs to be filed, and a 90-day deadline has been set for providing compensation to the families of students…
उच्चतम न्यायालय का निर्देश
उच्चतम न्यायालय का यह निर्देश केंद्र तथा बिहार, असम, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र द्वारा दायर उन याचिकाओं के बाद आया है जिनमें मामलों को बंद करने की मांग की गई थी। केंद्र और राज्यों ने पीठ को आश्वासन दिया कि तय विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामले पहले की गई प्रतिबद्धताओं के अनुसार वापस लिए जाएंगे।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह भी निर्देश दिया कि 20 से 26 जुलाई के बीच की घटनाओं के संबंध में कोई नयी एफआईआर दर्ज न की जाए। हालांकि, यह छूट उन अपराधों पर लागू नहीं होगी जिन्हें अदालत ने जांच के लिए विशेष रूप से अनुमति दी है।
कुख्यात अपराधी पर उठे सवाल
दिल्ली पुलिस को अपनी अर्जी में शामिल उन 2,873 लोगों के खिलाफ अलग से कार्रवाई आगे बढ़ाने की अनुमति दी गई है जिन पर शारीरिक चोट पहुंचाने या संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप हैं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों का सामना कर रहे लोग उचित कानूनी उपाय अपनाने के हकदार होंगे।
Big Victory for the Students!
— Cockroach Janta Party – CJP (@Cockroachisback) September 1, 2026
The Supreme Court has dismissed the unjust legal cases against students.
Our demands have been heard, and no student will face such action anymore.
Inquilab Zindabad! https://t.co/sLGSA9oa2O
प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि सीजेपी का हमेशा से यह मानना रहा है कि गंभीर अपराधों के आरोपी लोगों को सिर्फ इसलिए नहीं बचाया जाना चाहिए क्योंकि कथित अपराध विरोध प्रदर्शन के दौरान हुए थे। उन्होंने कहा-“चेहरा पहचानने वाली तकनीक (फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी) के आधार पर दिल्ली पुलिस की इस आशंका के बारे में कि विरोध स्थल पर लगभग 2,800 कथित कुख्यात अपराधी मौजूद थे, हमने सरकार के साथ बातचीत के दौरान तर्क दिया कि अगर ये 2,800 कुख्यात अपराधी वास्तव में वहां मौजूद थे, तो पहला सवाल यह उठता है कि वे समाज में खुले आम क्यों घूम रहे थे।”
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आपराधिक जांच पर आपत्ति
उन्होंने कहा कि संगठन को असली आपराधिक जांच से कोई आपत्ति नहीं है। प्रवक्ता सौरव दास ने कहा, “अगर उन्होंने विरोध स्थल पर बलात्कार, हत्या या अन्य गंभीर अपराध जैसे कोई जघन्य अपराध किए हैं, तो उन पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए, जांच होनी चाहिए और उन्हें जेल भेजा जाना चाहिए।”

प्रवक्ता सौरव दास के अनुसार, पुलिस द्वारा नामजद लोगों की जांच के लिए दिल्ली में अलग प्राथमिकी दर्ज करने की उच्चतम न्यायालय की अनुमति ने उस मुद्दे पर स्पष्टता ला दी, जो सरकार और सीजेपी के बीच विवाद का विषय बना हुआ था।
सरकार ने दिया आश्वासन
प्रवक्ता सौरव दास ने कहा – सीजेपी ने यह आश्वासन मांगा था कि परिवारों को 90 दिनों के भीतर उचित राशि मिलेगी और यह पैसा सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाएगा। उन्होंने कहा-“सरकार ने आज उच्चतम न्यायालय को यह आश्वासन दिया और नयायालय ने इसे स्वीकार करते हुए अपने आदेश में शामिल करके इसे न्यायिक मान्यता दी।” सुनवाई के दौरान, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि केंद्र ने इस मामले को सकारात्मक रूप से लिया है और सीजेपी प्रतिनिधियों को पहले दिए गए आश्वासनों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।

