मोदी सरकार की नई गोबरधन योजना लॉन्च, किसानों की बढ़ेगी आय
दिल्ली : सरकार देश में संपीड़ित बायोगैस को बढावा देने और इसे भविष्य के ऊर्जा स्रोतों का प्रमुख स्तंभ बनाने के लिए 23 हजार 731 करोड़ रूपये के कुल खर्च के साथ दस वर्ष के लिए गोबरधन योजना शुरू करने जा रही है।
Read More: कांग्रेस का आरोप- सरकार रोक रही राहुल का कार्यक्रम
Cabinet Briefing by Union Minister @AshwiniVaishnaw https://t.co/ed8RhushIN
— Ministry of Information and Broadcasting (@MIB_India) August 6, 2026
केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक प्रस्ताव मंजूर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी। सूचना और प्रसारण मंत्री अश्चिनी वैष्णव ने गुरुवार को यहां संवाददाता सम्मेलन में बताया कि मंत्रिमंडल ने 23,731 करोड़ रुपये की राष्ट्रीय पुर्नचक्रण जैव ऊर्जा , गोबरधन योजना को मंजूरी दे दी है। यह योजना कृषि अवशेष, पशु गोबर, चीनी मिलों के अपशिष्ट, नगर निकायों के जैविक कचरे और अन्य बायोमास संसाधनों को स्वच्छ ईंधन, जैविक खाद, ग्रामीण आय में बदलने के लिए शुरू की गई है।
यह योजना मौजूदा वित्त वर्ष से वित्त वर्ष 2035-36 तक लागू की जाएगी और इसका उद्देश्य संपीड़ित बायोगैस को भारत के भविष्य के ऊर्जा मिश्रण का एक प्रमुख स्तंभ बनाना है। इसका लक्ष्य घरेलू संपीड़ित बायोगैस उत्पादन में लगभग दस गुना वृद्धि, बड़े पैमाने पर निजी निवेश और देशभर में पुर्नचक्रण जैव अर्थव्यवस्था का निर्माण करना है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने संपीड़ित बायोगैस के लिए राष्ट्रीय एकीकृत योजना, गोबरधन को 23,731 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ मंजूरी दी।#CabinetDecisions pic.twitter.com/8R70AqFDy2
— MyGov Hindi (@MyGovHindi) August 6, 2026
गोबरधन योजना से होगा विकास
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा संचालित गोबरधन योजना, सुनिश्चित मांग, स्थिर मूल्य निर्धारण, पूंजी सहायता, पाइपलाइन अवसंरचना, ऋण सहायता और प्रौद्योगिकी विकास के माध्यम से संपीड़ित बायोगैस मूल्य शृंखला के लिए एकीकृत ढांचा उपलब्ध कराएगी।
यह योजना सतत वैकल्पिक परिवहन के लिए किफायती पहल , जैविक खाद के लिए बाजार विकास सहायता योजना, बायोमास मशीनरी योजना, पाइपलाइन अवसंरचना विकास योजना और राष्ट्रीय जैव ऊर्जा कार्यक्रम के तहत संपीड़ित बायोगैस संयंत्रों के लिए केंद्रीय वित्तीय सहायता जैसी पहले की पहलों पर आधारित है।
इन उपायों के माध्यम से 200 से अधिक संपीड़ित बायोगैस संयंत्रों को चालू किया गया है, उत्पादन और खरीद प्रणालियों को मजबूत किया गया है तथा जैविक खाद मूल्य शृंखला का विकास किया गया है।
गोबरधन योजना से विस्तार को गति देंगे

गोबरधन के तहत छह विकास इंजन इस क्षेत्र के विस्तार को गति देंगे। योजना एक संपीड़ित बायोगैस खरीद आश्वासन ढांचा स्थापित करेगी, जिसमें नगर गैस वितरण संस्थाओं द्वारा खरीद से सीएनजी (परिवहन) और पीएनजी (घरेलू) क्षेत्रों में अधिसूचित संपीड़ित बायोगैस मिश्रण दायित्व लक्ष्य को वित्त वर्ष 2026-27 में 3 प्रतिशत, वित्त वर्ष 2027-28 में 4 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2028-29 से आगे 5 प्रतिशत तक पूरा करने में सहायता मिलेगी।
इसके लिए योग्य ग्रीनफील्ड परियोजनाओं को स्थापित क्षमता के प्रतिदिन प्रति टन पर 2 करोड़ रुपये तक की पूंजी सहायता दी जाएगी। उत्पादन क्षमता बढ़ाने वाली ब्राउनफील्ड परियोजनाएं भी इसके लिए पात्र होंगी। यह योजना संयंत्रों को ट्रंक पाइपलाइनों और नगर गैस वितरण नेटवर्क से जोड़ने वाली पाइपलाइन अवसंरचना को सहायता प्रदान करेगी। इसके अतिरिक्त, एमएसएमई आधारित परियोजनाओं के लिए एक समर्पित ऋण गारंटी तंत्र उपलब्ध कराया जाएगा।
A vital step towards clean energy, rural prosperity and realising our collective dream of an Atmanirbhar Bharat!
— Narendra Modi (@narendramodi) August 6, 2026
The Cabinet has approved GOBARdhan Scheme, which will give a major boost to Compressed Biogas, with the aim of increasing domestic CBG production nearly ten-fold. The…
जैविक खाद अर्थव्यवस्था के विस्तार में सहायता करेगी
सरकार एक पारिस्थितिकी तंत्र चुनौती कोष भी स्थापित करेगी जो फीडस्टॉक संसाधन आकलन, एकत्रीकरण अवसंरचना, जिला स्तर के संयंत्रों, विकास योजना, प्रौद्योगिकी अपनाने, जैविक खाद के मूल्य संवर्धन, क्षमता निर्माण और हितधारक जागरूकता के लिए सहायता देगा। सरकार का कहना है कि परिवहन, घरेलू उपयोग, उद्योग और वाणिज्यिक क्षेत्रों में प्राकृतिक गैस की बढ़ती मांग को घरेलू नवीकरणीय उत्पादन के माध्यम से संपीड़ित बायोगैस संयंत्र से पूरा किया जा सकता है, जिससे आयातित जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम होगी।
यह योजना किसानों, फीडस्टॉक एकत्र करने वालों, सहकारी समितियों और ग्रामीण उद्यमियों के लिए आय के नए अवसर पैदा करके ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने, वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा देने, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने और जैविक खाद अर्थव्यवस्था के विस्तार में सहायता करेगी।

