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इरफ़ान सिद्दीक़ी को साहित्यिक श्रद्धांजलि

  • इरफ़ान सिद्दीक़ी की शायरी हमें मानी और मफ्हुम की एक नई दुनिया की सैर कराती है: डॉ. मिर्ज़ा शफ़ीक़
  • “सिलसिला अदब का” की तरफ़ से इरफ़ान सिद्दीकी की शायरी पर स्पीकर्स के विचार
इरफ़ान सिद्दीक़ी को साहित्यिक श्रद्धांजलि
इरफ़ान सिद्दीक़ी को साहित्यिक श्रद्धांजलि

लखनऊ: मशहूर और सम्मानित उर्दू ग़ज़ल शायर इरफ़ान सिद्दीकी को श्रद्धांजलि देने के लिए साहित्यिक संस्था “सिलसिला अदब का” की तरफ़ से UP प्रेस क्लब में एक यादगार साहित्यिक इवेंट का आयोजन किया गया।

बता दें कि इस यादगार इवेंट की अध्यक्षता महान शायर वासिफ फारूकी ने की। वासिफ फारूकी ने अपनी प्रेसिडेंशियल स्पीच देते हुए कहा – इरफ़ान सिद्दीकी कुछ भी खुलकर नहीं कहते थे। उन्हें जो कुछ भी कहना होता था, वह रहस्य और अपनेपन के लहज़े में कहते थे और शायरी की समझ और मतलब निकालने का काम पढ़ने वाले की समझ और श्रोता के टेस्ट पर छोड़ देते थे।

वे डिटेल नहीं, बल्कि कम शब्दों में लिखने वाले शायर थे। इस मौके पर मशहूर आलोचक और रहस्यवादी डॉ. मिर्ज़ा शफ़ीक हुसैन शफ़क़ ने मुख्य भाषण दिया और कहा कि इरफ़ान सिद्दीकी के शायराना अंदाज़ के अलग-अलग आयाम हैं। इरफ़ान सिद्दीकी ने शायरी को जो लहज़ा और तेवर दिये, वह उनका अपना अद्वितीय अंदाज़ है। इरफ़ान सिद्दीकी हमारे ज़माने के बहुत अहम शायर हैं। रूहानी ताकत और शायरी में गहराई के मामले में, वह अपने ज़माने के शायरों से अलग हैं।

ज़िंदगी की उनकी गहरी समझ उसमें छिपे राज़ों को सामने लाती है और हमें मतलबों और समझ की एक नई दुनिया की सैर कराती है। कार्यक्रम के खास मेहमान, उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व राज्य मंत्री श्री मोहसिन रज़ा ने बोलते हुए कहा कि इरफ़ान सिद्दीकी आज के ज़माने के सबसे अहम शायरों में से एक हैं। कोई भी पढ़ने वाला उनकी ग़ज़ल पढ़े बिना उर्दू ग़ज़ल नहीं समझ सकता।

लखनऊ की मासिक पत्रिका नया दूर के पूर्व प्रधान संपादक वज़ाहत रिज़वी ने कहा कि डॉ.मिर्ज़ा शफ़ीक हुसैन शफ़क़ ने एक ज्ञानवर्धक और विचारोत्तेजक प्रवचन दिया है और लखनऊ विश्वविद्यालय के लिए इरफ़ान सिद्दीकी पर एक बहुत ही विद्वत्तापूर्ण और रहस्यमय लेख भी लिखा है। मैंने इरफ़ान सिद्दीकी पर मासिक पत्रिका नया दूर का एक विशेष अंक प्रकाशित कर के महत्वपूर्ण पहलुओं को उजागर करने का प्रयास किया था, जिसे विषयगत सीमाओं के कारण युवा आलोचक डॉ. मिर्ज़ा शफ़ीक हुसैन शफ़क की पुस्तक में शामिल नहीं किया जा सका।

इरफ़ान सिद्दीक़ी को साहित्यिक श्रद्धांजलि
इरफ़ान सिद्दीक़ी को साहित्यिक श्रद्धांजलि

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मुमताज़ डिग्री कॉलेज के उर्दू विभाग के शिक्षक डॉ.यासिर जमाल ने कहा कि इरफ़ान सिद्दीकी की शायरी की सबसे बड़ी विशेषता समकालीन संवेदनशीलता है, यह गुण उन्हें उनके समकालीनों से अलग करता है। मशहूर शायरा सलमा हिजाब ने इरफ़ान सिद्दीकी की शायरी पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि इरफ़ान सिद्दीकी के परिवार में ज्ञान और साहित्य की मजबूत परंपराएं थीं और उनका प्रभाव उनके विचार और कला में भी दिखाई देता था। इस परिवार की पढ़ाई-लिखाई, साहित्यिक और सांस्कृतिक परंपराएं और तौर-तरीके ही उनकी पहचान थे। इरफान सिद्दीकी की शायरी इन्हीं परंपराओं और तौर-तरीकों की झलक है।

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इरफ़ान सिद्दीक़ी को साहित्यिक श्रद्धांजलि
इरफ़ान सिद्दीक़ी को साहित्यिक श्रद्धांजलि

सोशल एक्टिविस्ट वसीम हैदर ने कहा कि इरफान सिद्दीकी का लखनऊ से बहुत गहरा नाता है, इस लिहाज से हम लखनऊ के लोग उनका हक अदा नहीं कर पाए, लेकिन खुदा का शुक्र है कि सुल्तान-उल-जाकिरीन डॉ. मिर्ज़ा शफ़ीक हुसैन शफ़क ने उन पर एक ऐतिहासिक पुस्तक लिखकर हमें कुछ हद तक साहित्यिक हलकों में सुर्खरू कर दिया है। साजिदा सबा भी बधाई की हकदार हैं।

उन्होंने यह साहित्यिक इवेंट ऑर्गनाइज करके लखनऊ के लोगों का बोझ हल्का किया है। नय्यर उमर, अब्बास रजा तनवीर आज़मी, इकबाल यूसुफ ने इरफान सिद्दीकी को शायराना श्रद्धांजलि दी। इस प्रतिष्ठित इवेंट का संचालन मशहूर शायरा और “सिलसिला अदब का” की फाउंडर साजिदा सबा ने किया।

https://www.rekhta.org/poets/irfan-siddiqi/t20?lang=hi

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